Friday, March 13, 2026
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अमेरिका का बड़ा फैसला: कच्चे तेल की कीमतें $100 पार होने पर सभी देशों को रूसी तेल खरीदने की 30 दिन की छूट

वाशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे भारी तनाव और युद्ध के हालात ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरे संकट में डाल दिया है। इसके असर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चार साल बाद कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। बेतहाशा बढ़ती इन कीमतों को काबू में करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका ने सभी देशों को रूस से कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने की 30 दिन की अस्थाई मंजूरी दे दी है।
क्या हैं इस छूट की शर्तें और नियम?
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग (वित्त मंत्रालय) ने गुरुवार को इस संबंध में एक विशेष लाइसेंस जारी किया है।
किन पर लागू: यह छूट केवल उन रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की डिलीवरी और बिक्री पर मिलेगी, जो 12 मार्च की रात 12:01 बजे से पहले ही जहाजों पर लोड हो चुके थे।
कब तक मिलेगी छूट: यह एक अस्थाई राहत है, जो सिर्फ 11 अप्रैल (30 दिन) तक के लिए मान्य होगी।
फायदा: इस फैसले से समुद्र में फंसे रूस के उन तमाम ऑयल टैंकरों को बड़ी राहत मिलेगी, जो प्रतिबंधों के डर से अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पा रहे थे।
क्या है ट्रम्प प्रशासन का तर्क?
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव (वित्त मंत्री) स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि राष्ट्रपति ट्रम्प वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाना चाहते हैं।
बेसेंट ने स्पष्ट किया कि इस फैसले का मुख्य उद्देश्य दुनियाभर में तेल की सप्लाई बढ़ाना है ताकि आसमान छूती कीमतों पर लगाम लगाई जा सके। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस शॉर्ट-टर्म फैसले से रूस को कोई बहुत बड़ा आर्थिक फायदा नहीं होने वाला है। बेसेंट के मुताबिक, “रूस की कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा तेल निकालने के वक्त लगने वाले टैक्स से आता है। यह छूट सिर्फ उस तेल के लिए है जो पहले से ही रास्तों (ट्रांजिट) में मौजूद है।”
भारत ने पहले ही साफ कर दिया था अपना रुख
गौरतलब है कि इस व्यापक आदेश से पहले अमेरिका ने भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए प्रतिबंधों में ढील देने की बात कही थी। हालांकि, इस पर भारत ने बेहद सख्त और स्पष्ट प्रतिक्रिया दी थी। भारतीय अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा था कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और जरूरतों के लिए तेल खरीदने के मामले में किसी भी देश की ‘इजाजत’ पर निर्भर नहीं है।
बाजार पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र में फंसे रूसी तेल के बाजार में आने से सप्लाई चेन को कुछ हद तक राहत मिलेगी। हालांकि, जब तक मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के हालात शांत नहीं होते, तब तक कच्चे तेल की कीमतों में पूरी तरह से स्थिरता आना मुश्किल है।

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