Thursday, January 15, 2026
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इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में विकसित भारत २०४७ को लेकर उच्च शिक्षा पर मंथन शुरू

लखनऊ। इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग ने मानव संसाधन विकास केंद्र, इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के सहयोग से ‘ब्रिजिंग ट्रेडिशन एंड टेक्नोलॉजी: विकसित भारत २०४७ के लिए उच्च शिक्षा का रूपांतरण’ विषय पर कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम का शुभारंभ सेंट्रल ऑडिटोरियम में आयोजित उद्घाटन समारोह के साथ किया।
उद्घाटन समारोह में प्रोफेसर फ़ुरक़ान क़मर, प्रोफेसर सैयद अकील अहमद, प्रोफेसर ज़ेबा आक़िल एवं डॉ विनय कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की समृद्ध बौद्धिक परंपराओं को आधुनिक तकनीकी प्रगति के साथ जोड़ना समय की आवश्यकता है, ताकि विकसित भारत २०४७ के लक्ष्य को साकार किया जा सके। उन्होंने उच्च शिक्षा को समाज और राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बताया।कार्यक्रम के प्रथम दिन दो अकादमिक सत्र आयोजित किए गए। पहला सत्र ‘विकसित भारत २०४७ की समझ’ विषय पर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के डॉ विनय कुमार द्वारा प्रस्तुत किया गया। दूसरा सत्र ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली का दर्शन’ विषय पर आई आई टी कानपुर के प्रोफेसर ए के शर्मा द्वारा लिया गया। दोनों सत्रों में गंभीर, सार्थक एवं विचारोत्तेजक अकादमिक विमर्श हुआ। सत्रों का सुचारु समन्वय डॉ अंशल अली टाइगर, डॉ पल्लवी एवं डॉ ज्योत्सना शुक्ला द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के प्रथम दिन ८० से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता की। इनमें अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, दिल्ली यूनिवर्सिटी, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, जे एन यू, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, एमिटी यूनिवर्सिटी, कार्डन यूनिवर्सिटी अफ़ग़ानिस्तान, बी बी ए यू, जी एल एस यूनिवर्सिटी सहित अन्य संस्थानों के शिक्षक एवं शोधार्थी शामिल रहे।
१२ से १७ जनवरी २०२६ तक चलने वाला यह कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम उच्च शिक्षा के क्षेत्र में परंपरा और तकनीक के समन्वय को लेकर एक सुदृढ़ अकादमिक आधार स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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