लखनऊ 29 मार्च 2026।उत्तराखण्ड महापरिषद, लखनऊ के द्वारा रविवार को मोहन सिंह बिष्ट सभागार में सायं 6 बजे से भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से उत्तराखण्ड महापरिषद के रंगमण्डल के कलाकारों द्वारा दिल को छूने वाली ‘‘दो अकेली’’ – एक मार्मिक सामाजिक नाटक की शानदार प्रस्तुति दी गयी। मुख्य अतिथि के रूप में डा0 पूर्णिमा पाण्डेय – भातखण्डे संगीत संस्थान विश्वविद्यालय लखनऊ की प्रथम कुलपति एवं उ0प्र0 संगीत नाटक अकादमी द्वारा ‘‘रत्न सदस्यता’’ से वर्ष 2022 में अलंकृत तथा महापरिषद के संयोजक दीवान सिंह अधिकारी, अध्यक्ष हरीश चन्द्र पंत द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। महापरिषद द्वारा मुख्य अतिथि को पुष्प गुच्छ एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।

कान्ता शर्मा द्वारा लिखित नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन डा0 पूर्णिमा पाण्डेय एवं सह निर्देशन श्रीमती रोजी मिश्रा द्वारा किया गया।
यह नाटक दो बहनों की कहानी है, जो जीवनभर संघर्ष, दर्द और रिश्तों की उपेक्षा के बीच जीती हैं। एक ओर पति के अत्याचार सहती बड़ी बहन, तो दूसरी ओर कम उम्र में विधवा हो चुकी छोटी बहन – दोनों एक-दूसरे का सहारा बनती हैं, लेकिन अंततः हालात उन्हें फिर से अकेला कर देते हैं। रोजमर्रा की छोटी-छोटी नोकझोंक, प्यार, तकरार और संघर्ष के बीच उनकी जिंदगी हमें यह सिखाती है कि अकेलापन सिर्फ शरीर का नहीं, भावनाओं का भी होता है।

यह प्रस्तुति समाज के उस सच को उजागर करती है, जहां अपने ही कभी-कभी सबसे ज्यादा दूर हो जाते हैं। अकेलापन केवल शारीरिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी होता है। रिश्तों की अहमियत और मानवीय संवेदनाओं को समझना ही सच्चा समाज निर्माण है। दुख, इंसानियत, भावनाओं और रिश्तों की सच्चाई को दर्शाता यह हृदयस्पर्शी नाटक “दो अकेली” में रंगमण्डल के अनुभवी कलाकारों द्वारा जीवंत अभिनय किया गया, जिसकी दर्शकों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।

नाटक में प्रमुख भूमिका में नसीबन-सुषमा शुक्ला, जीनत-अनीता वर्मा, सज्जन मियाॅ-महेन्द्र गैलाकोटी, जलाल-योगेश शुक्ला, छोटु-वंश शुक्ला एवं सूत्रधार – अनुपम बिसरिया अपनी अपनी भूमिका निभाई तथा दर्शको नेे खूब सराहा एवं तालियाँ बजायी।
नाटक की विशेषताएँ:- समाज के यथार्थ का सजीव चित्रण-
महिलाओं की पीड़ा और संघर्ष की अभिव्यक्ति
भावनात्मक संवाद और प्रभावशाली अभिनय
रिश्तों की सच्चाई और मानवीय संवेदनाओं का गहन प्रदर्शन
नाटक का संदेश:- अकेलापन केवल शारीरिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी होता है। रिश्तों की अहमियत और मानवीय संवेदनाओं को समझना ही सच्चा समाज निर्माण है।

कार्यक्रम में पूरन सिंह जीना, भुवन पटवाल, महेश चन्द्र रौतेला, के0एस0 चुफाल, भुवन पाठक, राजेन्द्र सिंह कनवाल, रमेश चन्द्र अधिकारी, शेर सिंह भाकुनी, सुरेश चन्द्र जोशी, पंकज खर्कवाल, सुरेन्द्र राजेश्वरी, पुष्पा वैष्णव, हरितिमा पंत, शशि जोशी सहित सैकड़ों पदाधिकारी एवं दर्शकगण उपस्थित रहे। महापरिषद के अध्यक्ष श्री हरीश चन्द्र पंत द्वारा सांस्कृतिक मंत्रालय भारत सरकार, रंगमण्डल के कलाकारो, प्रिन्ट मीडिया, एवं उपस्थित दर्शक दीर्घा आभार व्यक्त कर समापन किया गया।

