Friday, February 27, 2026
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रेडियो केजीएमयू गूंज पर शुरू होगा ‘कहानी धरती की’, विज्ञान को समाज से जोड़ने की पहल

लखनऊ। एशिया का एकमात्र पुराविज्ञान को समर्पित संस्थान बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान ने विज्ञान को समाज के करीब लाने की दिशा में एक नई पहल करते हुए साप्ताहिक रेडियो कार्यक्रम ‘कहानी धरती की – जहाँ धरती बोलेगी और हम सब सुनेंगे’ शुरू करने की घोषणा की है। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की पूर्व संध्या पर संस्थान के सभागार में आयोजित समारोह में कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इसका प्रसारण तीन मार्च २०२६ से प्रत्येक मंगलवार अपराह्न तीन बजे से चार बजे तक रेडियो केजीएमयू गूंज ८९.६ मेगाहर्ट्ज पर किया जाएगा तथा इसे मोबाइल अनुप्रयोग के माध्यम से विश्वभर के श्रोता भी सुन सकेंगे।बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान और रेडियो केजीएमयू गूंज के संयुक्त सहयोग से तैयार यह कार्यक्रम पृथ्वी विज्ञान से जुड़ी खोजों और अनुसंधानों को सरल एवं रोचक शैली में आम लोगों तक पहुँचाने के उद्देश्य से शुरू किया जा रहा है।

कार्यक्रम के माध्यम से पृथ्वी के करोड़ों वर्षों के इतिहास, वैज्ञानिक तथ्यों और प्राकृतिक परिवर्तनों को विशेष रूप से विद्यार्थियों और युवाओं के लिए सहज भाषा में प्रस्तुत किया जाएगा।इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रो. महेश जी. ठक्कर तथा रेडियो केजीएमयू गूंज के कार्यकारी प्रमुख प्रो. के. के. सिंह ने कार्यक्रम का आधिकारिक पोस्टर और प्रचार ध्वनि संदेश जारी किया। उद्घाटन कड़ी का संक्षिप्त ध्वनि अंश भी उपस्थित जनों को सुनाया गया। समारोह में अवध विज्ञान भारती के प्रांत अध्यक्ष डॉ अरविंद माथुर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। रेडियो केंद्र की स्टेशन प्रबंधक श्रीमती शालिनी गुप्ता, संस्थान के वैज्ञानिक डॉ अनुपम शर्मा तथा कार्यक्रम समन्वयक डॉ निमिष कपूर ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

प्रो. महेश ठक्कर ने कहा कि यह कार्यक्रम वैज्ञानिक अनुसंधान और समाज के बीच की दूरी को कम करने का प्रयास है, जिसमें पृथ्वी के विकास, डायनासोर युग, ज्वालामुखीय घटनाओं, उल्का पिंड प्रभाव, मानव विकास और हिमयुग जैसी घटनाओं को रोचक कथाओं के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि रेडियो ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक ज्ञान पहुँचाने का प्रभावी माध्यम है तथा भविष्य में ‘१५० वैज्ञानिक, १५० कहानियाँ’ विषय पर दीर्घकालिक श्रृंखला विकसित करने की योजना है।

प्रो. के. के. सिंह ने सामुदायिक रेडियो की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन, वैश्विक ताप वृद्धि और विकासक्रम जैसे विषय आज मानवता के सामने महत्वपूर्ण वैज्ञानिक चुनौतियाँ हैं। इन विषयों को सरल भाषा में समझाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने इस पहल को जनजागरूकता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।मुख्य अतिथि डॉ अरविंद माथुर ने विज्ञान में समावेशिता और विविधता के महत्व पर जोर देते हुए वैज्ञानिक अनुसंधान तथा विज्ञान संचार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि रेडियो जैसे श्रव्य माध्यम ग्रामीण क्षेत्रों और युवाओं तक विज्ञान पहुँचाने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो सकते हैं।

डॉ अनुपम शर्मा ने ‘सभी के लिए विज्ञान’ की अवधारणा को इस पहल की प्रेरणा बताते हुए इसे राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर सार्थक कदम कहा। वहीं श्रीमती शालिनी गुप्ता ने कहा कि रेडियो आज भी जनसंचार का सबसे विश्वसनीय और जमीनी माध्यम है, जो समुदायों को ज्ञान से जोड़ता है।कार्यक्रम समन्वयक डॉ निमिष कपूर ने बताया कि इस श्रृंखला में संस्थान के वैज्ञानिक सीधे श्रोताओं से संवाद करते हुए पुराविज्ञान, जीवाश्म विज्ञान, पुरावनस्पति विज्ञान, भूविज्ञान और पृथ्वी विज्ञान के महत्व को समझाएंगे। प्रत्येक कड़ी में यह बताया जाएगा कि वैज्ञानिक किस प्रकार भूवैज्ञानिक साक्ष्यों का अध्ययन कर पृथ्वी के अतीत को समझते हैं और भविष्य के लिए टिकाऊ समाधान विकसित करने में योगदान देते हैं।
रेडियो केजीएमयू गूंज को ८९.६ मेगाहर्ट्ज तरंग पर, मोबाइल अनुप्रयोग तथा विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से सुना जा सकेगा। कार्यक्रम के आगामी अंकों को संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक लोग विज्ञान से जुड़ सकें।

अज़मत अली
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