Friday, January 16, 2026
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बैकफुट पर आया केजीएमयू प्रशासन,ओ पी डी बंदी का फैसला अनिश्चितकाल के लिए टला

लखनऊ।सरकार के सख्त रुख के बाद किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में हड़ताल के मुद्दे पर फिलहाल प्रशासन ने चुप्पी साध ली है। दूसरी ओर नगर निगम द्वारा थमाया गया गृहकर का नोटिस भी केजीएमयू प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे हालात में परिसर में हुई तोड़फोड़ की रिपोर्ट दर्ज होना तो दूर, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच भी कठिन नजर आ रही है।

इसी बीच केजीएमयू में ओ पी डी बंद करने का निर्णय अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है। कुलपति ने देर शाम हुई बैठक में कर्मचारी और चिकित्सक संगठनों के प्रतिनिधियों को प्रमुख सचिव गृह के साथ हुई वार्ता की अहम बातें बताईं और न्याय मिलने का भरोसा दिलाया। इसके बाद नाराज कर्मचारी और डॉक्टर मान गए और मरीजों के हित में ओ पी डी बंदी का फैसला स्थगित कर दिया गया।
इससे पहले कुलपति ने प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद से मुलाकात की थी। इस बैठक में बीते शुक्रवार को अपर्णा यादव के समर्थकों द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में किए गए उपद्रव को लेकर चर्चा हुई। हालात को देखते हुए मंगलवार को परिसर में पी एस सी की तैनाती कर दी गई है।
विवाद के बीच नगर निगम की टीम केजीएमयू पहुंची और विश्वविद्यालय के 60 भवनों पर गृहकर के रूप में 67 करोड़ रुपये का बिल थमा दिया। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार यह राशि काफी लंबे समय से बकाया है और इससे पहले भी केजीएमयू प्रशासन को कई बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
वहीं केजीएमयू में कथित कट्टरपंथी गतिविधियों और धर्मांतरण की जांच कर रही फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की जांच सोमवार को स्थगित कर दी गई थी। अब यह पूरा मामला एस टी एफ के हवाले कर दिया गया है। एस टी एफ की जांच में कई डॉक्टरों के बेनकाब होने की संभावना जताई जा रही है, जिसके चलते विश्वविद्यालय परिसर में अलग ही माहौल दिखाई दे रहा है।
उल्लेखनीय है कि 25 दिसंबर को कुलपति द्वारा गठित पांच सदस्यीय जांच टीम के समय शायद ही किसी ने सोचा था कि इस प्रकरण की जांच आगे चलकर एस टी एफ करेगी। बीते करीब 20 दिनों में आधा दर्जन से अधिक बैठकों के दौरान जांच टीम ने पैथोलॉजी विभाग के फैकल्टी और कर्मचारियों के अलग-अलग बयान भी दर्ज किए थे।

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