Tuesday, March 3, 2026
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एसजीपीजीआईएमएस 12–14 दिसंबर को मनाएगा शोध दिवस, पूर्व छात्र दिवस और 42वां स्थापना दिवस

लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआईएमएस), लखनऊ इस वर्ष 12, 13 और 14 दिसंबर 2025 को तीन दिवसीय विशेष समारोहों—छठा शोध दिवस, छठा पूर्व छात्र दिवस और 42वां स्थापना दिवस—को बड़े हर्षोल्लास के साथ आयोजित करेगा। 2020 में प्रो. आर. के. धीमन के नेतृत्व में शोध दिवस की शुरुआत संस्थान में मजबूत शोध संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी, और तब से यह परंपरा संस्थान की पहचान का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है।
डीन डॉ. शालीन कुमार ने कहा कि अनुसंधान एसजीपीजीआईएमएस के तीन प्रमुख स्तंभों में से एक है और यह स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप किफायती, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा समाधान विकसित करने में अहम भूमिका निभाता है। अनुसंधान नवाचार को गति देता है और स्वदेशी विकास व विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है। निदेशक प्रो. आर. के. धीमन ने संकाय और छात्रों में शोध के प्रति बढ़ती उत्सुकता पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों की तुलना में पोस्टर प्रस्तुतियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे संस्थान में आंतरिक और बाह्य दोनों प्रकार के अनुसंधान अनुदानों को बढ़ावा मिला है।
संकाय प्रभारी शोध, प्रो. विनीता अग्रवाल ने बताया कि छठे शोध दिवस पर लेक्चर थिएटर परिसर में संस्थान की शोध गतिविधियों का व्यापक प्रदर्शन किया जाएगा। संकाय सदस्य, शोधार्थी और छात्र अपने शोध कार्यों का प्रस्तुतीकरण करेंगे। कार्यक्रम में मुख्य व्याख्यान विश्व प्रसिद्ध आनुवंशिकीविद् डॉ. विनोद स्कारिया द्वारा दिया जाएगा। सहायक प्रभारी शोध, डॉ. अतुल गर्ग ने जानकारी दी कि कुल लगभग 320 पोस्टर—225 छात्र वर्ग और 95 संकाय वर्ग—प्रस्तुति के लिए प्राप्त हुए हैं, जिनका मूल्यांकन देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के वरिष्ठ संकाय सदस्य करेंगे। 14 दिसंबर को होने वाले 42वें स्थापना दिवस पर विजेताओं को संकाय वर्ग में 16 और छात्र वर्ग में 24 पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
शोध दिवस के बाद 13 दिसंबर को छठा पूर्व छात्र दिवस (Alumni Day) मनाया जाएगा। एक्सिक्यूटिव रजिस्ट्रार कर्नल वरुण बाजपेई ने बताया कि पिछले तीन दशकों से एसजीपीजीआईएमएस डीएम, एमसीएच, एमडी, पीएचडी, पोस्टडॉक्टोरल फेलोशिप, सर्टिफिकेट कोर्स और सीनियर रेजीडेंसी सहित उच्च-गुणवत्ता की चिकित्सा शिक्षा प्रदान कर रहा है। हाल के वर्षों में बीएससी व एमएससी नर्सिंग, तथा मेडिकल टेक्नोलॉजी में बीएससी (8 पाठ्यक्रम) और एमएससी (6 पाठ्यक्रम) ने संस्थान की शैक्षणिक मजबूती को और बढ़ाया है। पिछले 30 वर्षों में बड़ी संख्या में रेजिडेंट चिकित्सक और विद्यार्थी एसजीपीजीआईएमएस से प्रशिक्षित होकर निकले हैं और आज भारत व विदेशों के प्रतिष्ठित संस्थानों में नेतृत्व कर रहे हैं। मजबूत शैक्षणिक वातावरण, समर्पित विभागीय शिक्षण एवं सौहार्दपूर्ण कैंपस संस्कृति के कारण पूर्व छात्र संस्थान से गहरा लगाव रखते हैं।
इसी संबंध को सुदृढ़ करने के लिए निदेशक प्रो. आर. के. धीमन—जो स्वयं संस्थान के शुरुआती पूर्व छात्रों में से हैं—की देखरेख में पूर्व छात्र प्रकोष्ठ की स्थापना की गई। इस वर्ष दुनिया भर से लगभग 200 पूर्व छात्रों के अपने परिवारों के साथ समारोह में भाग लेने की उम्मीद है। कार्यक्रम में सांस्कृतिक गतिविधियों, खेलकूद और संवाद सत्रों का आयोजन होगा।
समारोहों की यह श्रृंखला 14 दिसंबर को 42वें स्थापना दिवस के साथ संपन्न होगी, जिसमें संस्थान की शिक्षण, प्रशिक्षण और अनुसंधान में उपलब्धियों को रेखांकित किया जाएगा। स्थापना दिवस की शुरुआत भर्ती मरीजों को पोषण पैक और “शुभकामना” कार्ड वितरित करने से होगी—जो दर्शाता है कि एसजीपीजीआईएमएस की प्रत्येक गतिविधि के केंद्र में रोगी कल्याण ही है। पूर्व वर्षों की तरह इस बार भी ट्रांसफ़्यूज़न मेडिसिन विभाग स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन करेगा, तथा पूरे परिसर में वृक्षारोपण अभियान भी चलाया जाएगा। स्थापना दिवस अभिभाषण नेशनल मेडिकल कमीशन के अध्यक्ष डॉ. अभिजात चंद्रकांत शेठ द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा।
1980 में स्थापना के बाद से एसजीपीजीआईएमएस निरंतर प्रगति करते हुए उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान और नेपाल तक के मरीजों के लिए अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं का प्रमुख केंद्र बन चुका है। निदेशक प्रो. राधा कृष्ण धीमन ने कहा कि संस्थान निरंतर सुधार के प्रति प्रतिबद्ध है और देश के अग्रणी चिकित्सा संस्थानों में अपनी स्थिति और मजबूत करने की दिशा में निरंतर अग्रसर है।

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