लखनऊ, 28 फरवरी। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में “नेत्र मंथन, विचार-मंथन सत्र: उत्तर प्रदेश में कॉर्नियल दान एवं प्रत्यारोपण की स्थिति—वर्तमान परिदृश्य और भावी दिशा” विषय पर राज्य स्तरीय मंथन सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश में कॉर्नियल अंधत्व की चुनौती, दान तंत्र की स्थिति तथा प्रत्यारोपण सेवाओं को सुदृढ़ करने की रणनीति पर विशेषज्ञों के बीच संवाद स्थापित करना रहा।
विशेषज्ञों ने बताया कि राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में देश में 49 हजार से अधिक कॉर्निया प्राप्त किए गए, जिनमें से लगभग 27 हजार प्रत्यारोपण के लिए उपयोगी पाए गए। जबकि देश में प्रतिवर्ष एक से दो लाख कॉर्निया की आवश्यकता होती है। भारत में कॉर्नियल अंधत्व से प्रभावित लोगों की संख्या लगभग दस से बारह लाख आंकी गई है तथा हर वर्ष हजारों नए मामले जुड़ते हैं, जिससे यह एक गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती बन गई है।

कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन उत्तर प्रदेश, अस्पताल प्रशासन विभाग तथा नेत्र विज्ञान विभाग द्वारा किया गया। उद्घाटन सत्र में चिकित्सा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अमित कुमार घोष, संस्थान के निदेशक प्रो आर.के. धीमन, राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन के निदेशक डॉ अनिल कुमार, डीन प्रो शालीन कुमार तथा प्रो राजेश हर्षवर्धन सहित अनेक विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
विशेषज्ञों ने कहा कि कॉर्नियल अंधत्व अधिकांश मामलों में रोके जाने योग्य है, परंतु जागरूकता की कमी, दाता पहचान प्रणाली की कमजोरी, समयबद्ध प्राप्ति और समन्वय की चुनौतियों के कारण दान किए गए ऊतकों का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता। जनजागरूकता, अस्पताल आधारित दाता पहचान, प्रशिक्षित प्रत्यारोपण समन्वयक तथा सुदृढ़ तंत्र विकसित करने पर विशेष बल दिया गया।
वैज्ञानिक सत्रों में प्रदेश के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों ने कॉर्नियल संक्रमण की रोकथाम, आई बैंक व्यवस्था, नियामकीय प्रावधान तथा सफल राज्यों की कार्यप्रणालियों पर विचार प्रस्तुत किए। “फ्रॉम होप टू हीलिंग: अ प्रैक्टिकल गाइड टू ट्रांसप्लांट सिस्टम्स इन इंडिया” पुस्तक का विमोचन भी किया गया, जिसे विशेषज्ञों ने उपयोगी मार्गदर्शिका बताया।
कार्यक्रम में 180 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। समापन पर नेत्रदान को सामाजिक दायित्व के रूप में अपनाने और प्रदेश में कॉर्नियल प्रत्यारोपण सेवाओं के विस्तार का सामूहिक संकल्प व्यक्त किया गया।

