कुलपति ने कहा कि इस माहौल में काम करना असंभव
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में चल रहे लव जिहाद प्रकरण के बीच शुक्रवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव अचानक केजीएमयू परिसर में प्रेस वार्ता करने पहुंच गईं। उनके साथ लगभग २५ से ३० समर्थक और कार्यकर्ता मौजूद थे। अपर्णा यादव के पहुंचने पर कुलपति कक्ष बंद मिला, जिसके बाद समर्थकों ने हंगामा शुरू कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, समर्थकों ने कुलपति कक्ष का दरवाजा जोर-जोर से धक्का देकर खोलने की कोशिश की, जिससे दरवाजे की सिटकनी टूट गई। हंगामे के दौरान एक गमला टूट गया और कुलपति कक्ष में रखा कंप्यूटर नीचे गिर गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अपर्णा यादव ने केजीएमयू परिसर में ही प्रेस वार्ता की और विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि केजीएमयू प्रशासन लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण जैसे मामलों में सख्ती नहीं बरत रहा है।
अपर्णा यादव के जाने के बाद केजीएमयू की कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद सहित वरिष्ठ चिकित्सक और अधिकारी मौके पर एकत्र हुए। कुलपति ने कहा कि इस तरह के माहौल में काम करना असंभव हो जाता है और विश्वविद्यालय परिसर में इस प्रकार की गुंडागर्दी किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने से कोई भी संगठन परिसर में आकर प्रदर्शन कर रहा है, जिससे कार्य वातावरण प्रभावित हो रहा है।
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉक्टर केके सिंह ने कहा कि जिन लोगों ने विश्वविद्यालय परिसर में तोड़फोड़ और उत्पात मचाया है, उनके खिलाफ प्रॉक्टर द्वारा मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब बड़ी संख्या में लोग बिना सूचना के कुलपति कक्ष में घुसकर नारेबाजी और अभद्र भाषा का प्रयोग करेंगे, तो क्या ऐसे में कुलपति की सुरक्षा सुनिश्चित कही जा सकती है।

बताया गया कि अपर्णा यादव पहले महिला आयोग के कार्यालय में प्रेस वार्ता करने वाली थीं, लेकिन उन्होंने अचानक कार्यक्रम बदलते हुए समर्थकों के साथ केजीएमयू पहुंचने का निर्णय लिया। इससे कुछ ही समय पहले कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने इसी मामले को लेकर विश्वविद्यालय में प्रेस वार्ता की थी, जिसमें विशाखा समिति की जांच रिपोर्ट और उस पर की गई कार्रवाई की जानकारी दी गई थी।
गौरतलब है कि दिसंबर २०२५ में केजीएमयू में लव जिहाद का मामला सामने आया था, जिसमें एक पीड़िता ने एक रेजिडेंट डॉक्टर पर धोखे से संबंध बनाने, गर्भवती करने, गर्भपात कराने और धर्मांतरण का दबाव डालने के गंभीर आरोप लगाए थे। पीड़िता ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर महिला आयोग में भी शिकायत दर्ज कराई थी।
कुलपति ने अपर्णा यादव द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि विशाखा समिति ने पंद्रह दिनों की गहन जांच के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी है और विश्वविद्यालय ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए संबंधित डॉक्टर को सेवा से हटाने के लिए स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेज दिया है। उन्होंने कहा कि केजीएमयू एक मंदिर के समान है, जहां लोगों को नया जीवन मिलता है, और यहां किसी भी प्रकार की अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
संवाददाता सम्मेलन कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद के नेतृत्व में संपन्न हुआ, जिसमें विशाखा समिति की अध्यक्ष डॉक्टर मोनिका कोहली, कुलानुशासक डॉक्टर आर.एस. कुशवाहा, शिक्षक संघ के अध्यक्ष एवं मीडिया प्रकोष्ठ प्रभारी डॉक्टर के.के. सिंह, सह प्रभारी डॉक्टर प्रेमराज सिंह तथा डॉक्टर अमित अग्रवाल के साथ-साथ नर्सिंग संघ, कर्मचारी संघ एवं छात्र संघ के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से संबोधन किया। सभी वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय इस प्रकरण को केवल आंतरिक विषय नहीं, बल्कि महिला सम्मान, नैतिकता और कानून के पालन से जुड़ा गंभीर मामला मानता है।

