Friday, January 16, 2026
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केजीएमयू में हंगामे के बाद बाह्य रोगी सेवाएं बंद करने का फैसला टला

लखनऊ के किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में दिनभर चले हाई वोल्टेज घटनाक्रम के बाद सोमवार देर रात अगले चौबीस घंटे के लिए बाह्य रोगी सेवाएं ठप करने का निर्णय वापस ले लिया गया। कुलपति के हस्तक्षेप और दबाव के बाद कर्मचारी तथा चिकित्सक संगठनों ने प्रस्तावित कार्य बहिष्कार को एक दिन के लिए स्थगित करने पर सहमति जताई। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार मंगलवार को सामान्य कामकाज होगा, जबकि दोपहर बाद संगठनों की बैठक कर आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।

विश्वविद्यालय प्रवक्ता ने बताया कि कुलपति के अनुरोध पर सभी संगठनों ने अपनी प्रस्तावित हड़ताल को चौबीस घंटे के लिए टाल दिया है। उम्मीद जताई गई है कि संबंधित घटना को लेकर तब तक प्राथमिकी दर्ज हो जाएगी। इससे पहले राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव से नाराज चिकित्सकों ने चौबीस घंटे का अल्टीमेटम दिया था कि यदि प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई तो तेरह जनवरी को बाह्य रोगी सेवाएं बंद रखी जाएंगी और केवल आकस्मिक सेवाएं संचालित होंगी।

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय बीते कई दिनों से विवाद और राजनीतिक खींचतान का केंद्र बना हुआ है। शिक्षकों, चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मियों और कर्मचारियों ने संयुक्त मोर्चा खोलते हुए आर-पार की लड़ाई का मन बनाया था। संगठनों का आरोप है कि नौ जनवरी को कुलपति कार्यालय परिसर में तोड़फोड़ की गई और महिला कर्मियों के साथ कथित रूप से अभद्रता हुई। लिखित शिकायत देने के बावजूद पुलिस द्वारा कार्रवाई न किए जाने से कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। उनका कहना है कि जब परिसर में कुलपति और वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षित नहीं हैं, तो अन्य कर्मियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े होते हैं।

इसी बीच कुलपति ने सोमवार सुबह राज्यपाल से मुलाकात की और बाद में मुख्यमंत्री को पूरे घटनाक्रम तथा विशाखा समिति की रिपोर्ट से अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों पर संतोष व्यक्त करते हुए सुरक्षा के संबंध में भरोसा दिलाया और सभी से धैर्य बनाए रखने की अपील की। धर्मांतरण और कट्टरपंथी गतिविधियों के आरोपों को गंभीर मानते हुए मुख्यमंत्री ने इसकी जांच विशेष कार्य बल से कराने के निर्देश दिए।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि कट्टरपंथी गतिविधियों की जांच के लिए गठित सात सदस्यीय तथ्य खोज समिति की कार्रवाई फिलहाल स्थगित कर दी गई है और अब पूरे मामले की जांच विशेष कार्य बल करेगा। शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि समयसीमा के भीतर प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई, तो बाह्य रोगी सेवाएं बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। बढ़ते तनाव को देखते हुए परिसर की सुरक्षा भी कड़ी कर दी गई है।

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