लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के गेट नंबर दो के सामने गुरुवार को अखिल भारतीय सपेरा महासभा के बैनर तले सपेरा समाज के लोगों ने बीन बजाकर विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र होकर जैसे ही बीन बजाने लगे, मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। स्थिति को देखते हुए केजीएमयू प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और समझा-बुझाकर प्रदर्शनकारियों को शांत कराया।
केजीएमयू के जन सम्पर्क अधिकारी डॉ के के सिंह ने कहाँ कि प्रदर्शनकारी के पास कोई ज्ञापन नही था,ऐसा लगता था किसी के बहकावे में आकर यह लोग मेडिकल कालेज के सामने हंगामा करने पहुचे थे,उन्हों ने कहाँ कि इनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जाएगी।
प्रदर्शन कर रहे सपेरा समाज के लोगों का आरोप है कि केजीएमयू में संविदा नियुक्तियों में स्थानीय सपेरा समाज को नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को नौकरी दी जा रही है। उनका कहना है कि लखनऊ में पीढ़ियों से रह रहे सपेरा समाज के लोग बेरोजगारी के कारण भीख मांगने को मजबूर हैं, वहीं बाहरी और संदिग्ध लोगों को रोजगार दिया जा रहा है।
अखिल भारतीय सपेरा महासभा के अध्यक्ष श्रीपतनाथ सपेरा ने कहा कि मुख्यमंत्री दलित और वंचित समाज के सामाजिक व आर्थिक विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन केजीएमयू में सपेरा समाज के साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समाज के कई युवा हाईस्कूल और इंटर तक पढ़े होने के बावजूद रोजगार से वंचित हैं और मजबूरी में तमाशा दिखाने जैसे काम करने पड़ रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुलपति कार्यालय में नियुक्त सैयद अब्बास और पर्यावरण सेल से जुड़े डॉ. परवेज सपेरा समाज के हक की नौकरियों पर डाका डाल रहे हैं। श्रीपतनाथ ने कहा कि आज बीन बजाकर विश्वविद्यालय में छिपे ‘सपोलों’ को बाहर निकालने का प्रतीकात्मक प्रयास किया गया है। यदि अधिकारों का दमन इसी तरह जारी रहा तो आंदोलन और व्यापक किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि केजीएमयू प्रशासन का तर्क है कि नियुक्तियां सेवायोजन पोर्टल के माध्यम से होती हैं, लेकिन यदि सपेरा समाज इतना शिक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम होता तो वह संविदा श्रेणी की नौकरियों के लिए क्यों संघर्ष करता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो सपेरा समाज सांपों के साथ केजीएमयू परिसर में प्रवेश कर आंदोलन करेगा।

