Monday, February 23, 2026
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उत्तराखण्ड महोत्सव-2025 की पूर्व संध्या पर “कॉंफव डांडिया नाइट” में गूंजे पहाड़ी गीत, झूम उठा लखनऊ

लखनऊ, 8 नवम्बर 2025।
उत्तराखण्ड महोत्सव-2025 की पूर्व संध्या पर उत्तराखण्ड महापरिषद, लखनऊ द्वारा पंडित गोविंद बल्लभ पंत सांस्कृतिक उपवन, लखनऊ के हृदयस्थल पर एक भव्य एवं उल्लासपूर्ण “डांडिया नाइट” का आयोजन किया गया। इस रंगारंग कार्यक्रम में उत्तराखण्ड की पारंपरिक संस्कृति, लोकसंगीत और नृत्य की अद्भुत झलक देखने को मिली।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और “जय बद्री विशाल” के उद्घोष के साथ हुई। इसके पश्चात उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध पहाड़ी गीतों — “बेडू पाको बारामासा”, “फुलदेई छम्मा छम्मा”, “छोड़ दे दैय्या बासंती”, “म्यर पहाड़”, “झुमका गिरा रै नैनीताल मा” तथा “घुघूती बसूती” — की मधुर धुनों पर पारंपरिक डांडिया नृत्य प्रस्तुत किया गया। पहाड़ी सुरों पर थिरकते कदमों और छड़ियों की झंकार ने पूरे वातावरण को उत्सव और उमंग से भर दिया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और वरिष्ठ जनों ने भाग लिया। विशेष रूप से श्रीमती पुष्पा वैष्णव, हेमा बिष्ट, शशि जोशी, हरितिमा पंत, पूनम कंवल, देवश्री पंवार, सुनीता रावत, कमला चुफ़ाल, मनीषा चिलवाल, शोभा रावत आदि ने अपनी ऊर्जावान सहभागिता से कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। वहीं श्री जगत सिंह राणा, पूरन सिंह जीना, भारत सिंह बिष्ट, महेन्द्र गैलाॅकोटी, राजेश बिष्ट, पान सिंह, कैलाश सिंह, रमेश अधिकारी, चंद्रमोहन जोशी, पंकज खर्कवाल सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे और उन्होंने अपने नृत्य व उत्साह से माहौल को और भी रोशन कर दिया।
इस अवसर पर कल्याणपुर, कुमाउँांचल नगर, पंतनगर, तेलीबाग, गोमतीनगर तथा अलीगंज क्षेत्रों से आए विभिन्न लोक कलाकार समूहों ने भी अपनी-अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में चार चाँद लगाए। ढोल-दमाऊं, हुड़का और रणभेरी की थाप पर सभी उपस्थित जन पारंपरिक लय में झूम उठे।
महापरिषद के पदाधिकारियों ने बताया कि “डांडिया नाइट” का उद्देश्य उत्तराखण्ड की लोकधुनों को आधुनिक मंच पर प्रस्तुत करते हुए युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है। यह आयोजन उत्तराखण्डी अस्मिता और एकता का प्रतीक है।
पूरा आयोजन अत्यंत रंगीन, उल्लासमय और सांस्कृतिक समरसता से परिपूर्ण रहा। उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति ने डांडिया नाइट का भरपूर आनंद लिया। यह आयोजन मध्यरात्रि तक चलता रहा, और अंत में सामूहिक प्रस्तुति “घुघूती बसूती” के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
यह डांडिया नाइट आगामी “उत्तराखण्ड महोत्सव-2025” (दिनांक 9 से 18 नवम्बर 2025) की सांस्कृतिक प्रस्तावना के रूप में आयोजित की गई, जिसने लखनऊ के सांस्कृतिक परिदृश्य में उत्तराखण्ड की लोकधुनों का जादू बिखेर दिया।
कल का कार्यक्रम — “उत्तराखण्ड महोत्सव-2025”
स्थान: पंडित गोविंद बल्लभ पंत सांस्कृतिक उपवन, लखनऊ
दिनांक: 9 नवम्बर 2025 (रविवार)
उत्तराखण्ड महोत्सव-2025 के मुख्य आयोजन कल से प्रारंभ होंगे। महोत्सव के पहले दिन विविध सांस्कृतिक एवं लोककला से जुड़े कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी —
🕙 प्रातः 10:00 बजे से — स्वदेशी उत्पादों की प्रदर्शनी
उत्तराखण्ड के विभिन्न जिलों से आए स्वदेशी उत्पाद, हस्तशिल्प, बुनकरी, जड़ी-बूटी, ऊनी वस्त्र, हस्तनिर्मित आभूषण और स्थानीय उत्पादों की झलक प्रदर्शित की जाएगी।
🕑 दोपहर 2:00 बजे से — विभिन्न झोड़ा दलों द्वारा पारंपरिक झोड़ा नृत्य
कुमाऊँ और गढ़वाल के पारंपरिक झोड़ा दल अपनी लोक लय और सामूहिक नृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे।
🕓 सायं 4:00 बजे से — छोलिया नृत्य प्रस्तुति
उत्तराखण्ड की शौर्य और लोकगाथाओं का प्रतीक “छोलिया नृत्य” अपनी वीरता और ऊर्जा से मंच को रोमांचित करेगा।
🕕 सायं 6:30 बजे — “उत्तराखण्ड महोत्सव-2025” का भव्य उद्घाटन समारोह
उद्घाटन समारोह में विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में दीप प्रज्वलन और औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा।
🕖 सायं 7:00 बजे से आगे — “नाचेगा भारत” — विशेष सांस्कृतिक संध्या
देवभूमि ब्रज जनसरोकार समिति, लखनऊ, कुर्मांचल नगर दल, और नृत्य डांस अकादमी द्वारा भव्य नृत्य प्रस्तुतियाँ दी जाएँगी।
इसी क्रम में श्री सुभाष देवड़ी, चमोली से आए दल द्वारा विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति दी जाएगी।
🌺 डांस उत्तराखण्ड डांस — सीजन – 4
महोत्सव की इस विशेष प्रस्तुति में तीन प्रमुख दल अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे —

  1. ब्रह्मकमल सांस्कृतिक समिति, इन्दिरा नगर
  2. आर्ट एंड कल्चरल ग्रुप, शिवानी विहार
  3. देवभूमि जनसरोकार समिति, गोमती नगर
    यह संपूर्ण दिवस विविधता और लोकसंपर्क से परिपूर्ण रहेगा। उत्तराखण्ड की कला, संस्कृति, लोकनृत्य और परंपराओं का यह अनूठा संगम लखनऊ के जनमानस को देवभूमि की सुगंध से सराबोर करेगा।

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