Monday, February 23, 2026
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लखनऊ में गूंजे उत्तराखंड के सुर: ‘काफव वार ऑफ बैंड्स’ में रॉक और लोक संगीत का शानदार संगम

लखनऊ, 7 नवम्बर 2025।उत्तराखंड महापरिषद द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में आज राजधानी लखनऊ के पंडित गोविंद बल्लभ पंत सांस्कृतिक उपवन, बीरबल साहनी मार्ग स्थित गोमती तट पर संगीत प्रेमियों के लिए एक यादगार शाम देखने को मिली।
पहली बार आयोजित ‘काफव वार ऑफ बैंड्स’ ने लखनऊ के संगीतप्रेमियों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उत्तराखंड और अन्य राज्यों से आए रॉक बैंड्स ने मंच पर अपने ऊर्जावान प्रदर्शन से ऐसा माहौल बनाया कि गोमती किनारा तालियों की गड़गड़ाहट और संगीत की लहरों से गूंज उठा।कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों और आयोजकों ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। इसके बाद जब पहले बैंड ने मंच संभाला, तो दर्शकों की उत्साहभरी तालियों ने माहौल को जीवंत कर दिया।

इस आयोजन में ‘द मॉर्निंग स्टार’, ‘इक्विनोक्स’, ‘ओरिजिनल नोट’, ‘त्रिनाद एक्सक्लूजन’ और ‘रूबरू’ जैसे लोकप्रिय बैंड्स ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियाँ दीं। प्रत्येक बैंड ने अपनी मौलिक रचनाओं के साथ-साथ उत्तराखंड की लोकधुनों और फ्यूजन म्यूजिक का बेहतरीन मिश्रण पेश किया, जिसने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम की सबसे खास प्रस्तुति ‘परामेष्ट फोक बैंड’ की रही, जिसने गेस्ट परफॉर्मर के रूप में मंच संभाला और अपनी लोक व रॉक फ्यूजन परफॉर्मेंस से सभी का दिल जीत लिया। जब मंच से ‘शिव कैलाशों के वासी’, ‘जय हो’ और ‘उत्तराखंडी मेस अप’ जैसी धुनें बजीं, तो युवा ही नहीं, वरिष्ठ दर्शक भी ताल पर झूम उठे।
पूरे कार्यक्रम का संचालन रेडियो जगत के जाने-माने आर.जे. प्रतीक ने किया, जिन्होंने अपनी ऊर्जावान एंकरिंग से माहौल को लगातार जीवंत बनाए रखा। आर.जे. प्रतीक ने कहा —“लखनऊ में इस तरह का रॉक एंड फोक फ्यूजन इवेंट पहली बार हुआ है। यह युवाओं को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक संगीत से जोड़ने का शानदार प्रयास है। ऐसे आयोजनों से नए कलाकारों को मंच मिलता है और दर्शक विविध संगीत शैलियों का आनंद उठा पाते हैं।”
उन्होंने इस कार्यक्रम की सफलता के लिए उत्तराखंड महापरिषद के सचिव राजेश बिष्ट और उनकी टीम को बधाई दी।
कार्यक्रम में उत्तराखंड महापरिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी — संयोजक श्री दीवान सिंह अधिकारी, हेम सिंह, अध्यक्ष हरिश्चंद्र पंत, महासचिव भरत सिंह बिष्ट, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मंगल सिंह रावत, भुवन पटवाल, सुरेश चंद्र पांडे, अवधेश कोठारी, रमेश सिंह अधिकारी, पान सिंह, सुरेश जोशी, गोविंद बल्लभ फुलारा, महेश चंद्र सिंह रौतेला और राजेंद्र सिंह कनवाल सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
सभी अतिथियों ने एक स्वर में कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन न केवल उत्तराखंड की लोक विरासत को जीवित रखते हैं, बल्कि युवाओं में ऊर्जा, एकता और गर्व की भावना भी जगाते हैं।
कार्यक्रम का समापन दर्शकों की तालियों और बैंड्स की जोशीली धुनों के साथ हुआ — एक ऐसी शाम, जिसने लखनऊ के आसमान में लोक और रॉक संगीत का संगम रचा और साबित किया कि संगीत सच में सीमाओं से परे जोड़ने वाली सबसे सशक्त कड़ी है।

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