Monday, February 23, 2026
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कमांड हॉस्पिटल लखनऊ में अंगदान से तीन लोगों को मिला नया जीवन, मृतक महिला के परिवार ने पेश की मानवता की मिसाल

लखनऊ, 8 नवम्बर 2025।
करुणा, साहस और सेवा की अनूठी मिसाल पेश करते हुए लखनऊ के कमांड हॉस्पिटल (सेंट्रल कमांड) में एक 55 वर्षीय महिला के परिवार ने उनके निधन के बाद यकृत (Liver) और दोनों गुर्दे (Kidneys) दान कर तीन लोगों को नया जीवन दिया। यह इस वर्ष कमांड हॉस्पिटल लखनऊ में हुआ दूसरा कैडेवरिक (मृत शरीर से अंगदान) ट्रांसप्लांट है, जिसने उत्तर प्रदेश में अंगदान अभियान को नई दिशा दी है।
महिला को 28 अक्टूबर 2025 को साँप के काटने के बाद हाइपॉक्सिक ब्रेन इंजरी (Hypoxic Brain Injury) हो गई थी। प्रारंभिक उपचार एक सिविल अस्पताल में किया गया, जिसके बाद उन्हें कमांड हॉस्पिटल लखनऊ में भर्ती कराया गया। गहन चिकित्सा देखभाल और विशेषज्ञों के अथक प्रयासों के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका।
6 नवम्बर 2025 को अस्पताल की ब्रेन स्टेम डेथ कमिटी, जिसमें ब्रिगेडियर ए.जी. माथुर और लेफ्टिनेंट कर्नल पुष्पोम जी शामिल थे, ने चिकित्सकीय जांच के बाद उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया।
इसके बाद ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर मेजर रिफाउंसा ने अत्यंत संवेदनशीलता के साथ परिवार से संपर्क किया। मृतका के पति, जो भारतीय सेना में सेवारत हैं, तथा परिजनों ने अत्यंत मानवीय निर्णय लेते हुए उनका यकृत और दोनों गुर्दे जरूरतमंद मरीजों को दान करने की स्वीकृति दी।
अंगदान की प्रक्रिया AORTA (Armed Forces Organ Retrieval and Transplant Authority) तथा SOTTO–उत्तर प्रदेश (State Organ and Tissue Transplant Organization) के समन्वय में संपन्न हुई।
यकृत को आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल), नई दिल्ली भेजा गया।एक गुर्दा कमांड हॉस्पिटल लखनऊ में और दूसरा एसजीपीजीआईएमएस लखनऊ में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया।
यकृत को कमांड हॉस्पिटल से चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट तक पहुँचाने के लिए लखनऊ पुलिस और प्रशासन के सहयोग से एक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। यह मिशन मेजर योगेश चौधरी के निर्देशन में संपन्न हुआ, जिसके बाद अंग को भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से नई दिल्ली एयरलिफ्ट किया गया।
यह जटिल बहु-अंग प्रत्यारोपण प्रक्रिया (Multi-organ Transplant Operation) पूरी रात चली और इसे मेजर जनरल आलोक भल्ला, वी.एस.एम., कमांडेंट, कमांड हॉस्पिटल (सी.सी.) लखनऊ के नेतृत्व में संपन्न किया गया। इस टीम में कर्नल सुदीप प्रकाश, कर्नल भारत कुमार, कर्नल जे.एस. भाटिया, ले. कर्नल एच.एस. बिंदल, ले. कर्नल रजत भाकर, विंग कमांडर शौर्य, ले. कर्नल निपुण सहित दिल्ली से आई विशेषज्ञ टीम के कर्नल डी. राउत, कर्नल निशांत पाठक और मेजर महेश्वरी शामिल थे।
इस अभियान की सराहना करते हुए डॉ. राजेश हर्षवर्धन, संयुक्त निदेशक, SOTTO–उत्तर प्रदेश, ने कमांड हॉस्पिटल की पूरी टीम को बधाई दी और कहा “यह सामूहिक प्रयास उत्तर प्रदेश में अंगदान जागरूकता और चिकित्सा समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस मिशन ने साबित किया कि ‘अंगदान – महादान’ केवल नारा नहीं, बल्कि जीवन देने का सर्वोच्च उपहार है।”
SOTTO–UP, जो एसजीपीजीआईएमएस लखनऊ के अंतर्गत कार्यरत है, राज्य में अंगदान, अंग-निकासी और प्रत्यारोपण समन्वय की प्रमुख संस्था है। डॉ. हर्षवर्धन के नेतृत्व में इस मिशन के दौरान समयबद्ध चिकित्सा समन्वय और लॉजिस्टिक सहायता सुनिश्चित की गई।
SOTTO–UP की टीम, जिसमें डॉ. थॉमस, डॉ. अभिषेक, श्रीमती कर्तूरी सिंह, श्री भोलेश्वर और श्रीमती नीलिमा दीक्षित शामिल थे, रात 2:30 बजे कमांड हॉस्पिटल पहुँची और सुबह 5:00 बजे तक सफल अंग निकासी (Organ Retrieval) का कार्य पूरा किया।
निकाले गए गुर्दों में से एक को एसजीपीजीआईएमएस, लखनऊ में 31 वर्षीय मरीज में प्रत्यारोपित किया गया, जिसने अब स्वस्थ होकर नया जीवन शुरू किया है।
डॉ. हर्षवर्धन ने इस मिशन को “A Race Against Time” (समय के विरुद्ध दौड़) बताते हुए कहा कि यह अभियान मानवता, समर्पण और समन्वय की एक अनूठी मिसाल है।
यह पूरी प्रक्रिया — कमांड हॉस्पिटल, एसजीपीजीआईएमएस और SOTTO–UP के संयुक्त सहयोग से — यह दर्शाती है कि जब सेवा, विज्ञान और संवेदना एक साथ जुड़ते हैं, तो जीवनदान का यह महादान संभव हो पाता है।

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