Tuesday, September 15, 2026
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एसजीपीजीआई में टीबी निदान के लिए एनजीएस कार्यशाला

लखनऊ। एसजीपीजीआईएमएस के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की बीएसएल-३ टीबी लैब में १० से १२ सितंबर तक नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग (एनजीएस) पर पहली हैंड्स-ऑन कार्यशाला आयोजित की गई। ‘सीक्वेंस से समाधान तक: सटीक टीबी निदान के लिए एनजीएस’ विषय पर आयोजित कार्यशाला का उद्देश्य तपेदिक के निदान और अनुसंधान में आधुनिक अनुक्रमण तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देना रहा।
संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर.के. धीमन के मार्गदर्शन में प्रो. ऋचा मिश्रा के प्रस्ताव पर आईओसीएल के सीएसआर सहयोग से संस्थान को आधुनिक एनजीएस प्लेटफॉर्म इलुमिना एमआईसेक आई१०० प्लस प्राप्त हुआ है। एसजीपीजीआई में टीबी के लिए एनजीएस सुविधा उत्तर प्रदेश में पहली बताई गई है। एक ही अनुक्रमण प्रक्रिया से रोगजनक की पहचान के साथ कई दवाओं के प्रति प्रतिरोध से जुड़े उत्परिवर्तनों का पता लगाया जा सकता है, जिससे निदान में लगने वाला समय कम होगा।
कार्यशाला में देशभर के मेडिकल कॉलेजों, निदान प्रयोगशालाओं और अनुसंधान संस्थानों से १५ प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों को लक्ष्य संवर्धन, लाइब्रेरी तैयार करने, पीसीआर क्लीन-अप, मात्रा निर्धारण, पूलिंग, एमआईसेक आई१०० प्लस पर रन सेट-अप तथा जैव सूचना विज्ञान और अनुक्रमण डेटा विश्लेषण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला का उद्घाटन निदेशक प्रो. राधा कृष्ण धीमान ने किया। आयोजन प्रो. ऋचा मिश्रा के साथ डॉ. विक्रमजीत सिंह, डॉ. अक्षय कुमार आर्य, डॉ. आशिमा जमवाल, डॉ. सना इस्लाही और डॉ. रोम्या सिंह की टीम ने किया। टाटा मेडिकल सेंटर कोलकाता के डॉ. संजय भट्टाचार्य, सीबीएमआर लखनऊ के डॉ. प्रभाकर यादव और डॉ. शिशिर कुमार गुप्ता तथा एनआईपीईआर रायबरेली के डॉ. अभिषेक डे ने विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिए। इलुमिना और प्रेमास लाइफ साइंसेज ने वेट लैब में सहयोग किया। तीन दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिभागियों ने नमूने से लेकर अनुक्रमण और परिणाम तक पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।

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