अयोध्या, 08 नवम्बर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव श्री अयोध्या धाम-2026 के अवसर पर निषाद बस्ती में आयोजित दीपावली मिलन कार्यक्रम में शामिल होकर स्वच्छता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सफाईकर्मियों को सम्मानित किया और दीपावली का उपहार भेंट किया। उन्होंने निषाद परिवारों, नाविकों, दलित परिवारों, पार्षदों तथा अयोध्या की सुंदरता, स्वच्छता और सुव्यवस्था में योगदान देने वाले नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दीपावली का उपहार भगवान श्रीराम के उन सहयोगियों और मित्रों की विरासत को सम्मानपूर्वक आगे बढ़ाने का प्रयास है, जिन्होंने उनके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भगवान श्रीराम ने निषादराज, माता शबरी, वानर और भालुओं सहित समाज के विभिन्न वर्गों को साथ लेकर अधर्म के विरुद्ध संघर्ष किया था। सभी के सामूहिक सहयोग और सहभागिता से ही विजय प्राप्त हुई। यही सामाजिक समरसता, सहयोग और एकजुटता की हमारी महान विरासत है।
उन्होंने कहा कि कल अयोध्या में दीपोत्सव अत्यंत भव्यता और दिव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस आयोजन में लाखों श्रद्धालु पहुंचे और 30 लाख से अधिक दीपक प्रज्वलित किए गए। देर रात तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहने के बावजूद सुबह सभी घाट स्वच्छ और सुंदर दिखाई दिए। कहीं भी गंदगी, अव्यवस्था अथवा अराजकता नजर नहीं आई। सड़कों पर युवाओं के समूह हनुमानगढ़ी और श्रीराम जन्मभूमि में दर्शन के लिए जाते दिखाई दिए। यह सफाईकर्मियों और व्यवस्था में जुटे सभी लोगों के समर्पण का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने सफाईकर्मियों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पूरी व्यवस्था को अत्यंत जिम्मेदारी और समर्पण के साथ संभाला। सरयू आरती के दौरान नाविकों की मुस्तैदी और योगदान भी सराहनीय रहा। अयोध्या में प्रत्येक शनिवार, रविवार, अमावस्या, पूर्णिमा और प्रमुख पर्वों पर लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। मां सरयू में स्नान और प्रभु श्रीराम के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा में नाविकों, मांझियों और निषाद समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। उनके इसी योगदान के सम्मान में आज यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है।
योगी ने कहा कि अयोध्या का नाम आज देश-दुनिया में श्रद्धा और सम्मान के साथ लिया जाता है। अयोध्या का निवासी होना अपने आप में गौरव की बात है। भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने पर उनके स्वागत में पूरे भारतवर्ष में दीप जलाए गए थे। हमारे ऋषियों, पूर्वजों और संतों ने दीपावली, होली, रक्षाबंधन, विजयादशमी, रामनवमी, विवाह पंचमी और अयोध्या के झूला मेले जैसे पर्वों के माध्यम से सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं को आज भी जीवंत रखा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार निर्माण कार्य करा सकती है, लेकिन निर्मित व्यवस्थाओं को सुरक्षित रखना और उनका संरक्षण करना स्थानीय नागरिकों की जिम्मेदारी है। यदि विकास कार्यों के बाद लोग ही सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने लगेंगे तो ऐसे निर्माण का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। इसलिए अयोध्या को सुंदर बनाने के साथ उसकी सुंदरता, गरिमा और प्रतिष्ठा बनाए रखना भी जरूरी है। आज की अयोध्या त्रेतायुग की स्मृतियों को जीवंत करती दिखाई दे रही है। इसका श्रेय यहां के नागरिकों, सफाईकर्मियों, नाविकों, निषाद समाज, पार्षदों और विकास कार्यों में योगदान देने वाले सभी लोगों को जाता है।
उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियां भी इस योगदान के लिए अपने पूर्वजों पर गर्व करेंगी कि जब नई अयोध्या का निर्माण हो रहा था, तब वे किसी न किसी रूप में इस पुनीत कार्य से जुड़े थे। मुख्यमंत्री ने बताया कि मंच से कुछ लोगों को सांकेतिक रूप से दीपावली उपहार दिए गए हैं और नगर निगम तथा प्रशासन के माध्यम से सभी पात्र लोगों को उपहार उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने सभी से दीपावली की खुशियां अपने परिवार और प्रियजनों के साथ साझा करने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या के वैभव और प्रतिष्ठा को फिर से धूमिल करने का कोई प्रयास सफल नहीं होना चाहिए। अयोध्या की पंचकोसी, 14 कोसी और 84 कोसी परिक्रमा पर अब कोई प्रतिबंध नहीं लगा सकता। यह हम सभी के सामूहिक संकल्प का प्रतीक होना चाहिए। प्रभु श्रीराम की अयोध्या को स्वच्छ, सुंदर, सुव्यवस्थित और मर्यादित स्वरूप में आगे बढ़ाना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अयोध्या धाम स्थित रुक्मिणी महल का लोकार्पण भी किया। इससे पूर्व उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर और श्री हनुमानगढ़ी मंदिर में दर्शन-पूजन किया तथा दिगंबर अखाड़ा, बड़ा भक्तमाल और छावनी में महंतों से आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कारसेवकपुरम में महंतगणों को दीपावली का उपहार भेंट किया और गोमाता को गुड़ एवं केला खिलाया। कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, अयोध्या के महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी, जनप्रतिनिधि, शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, संतजन और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


