Saturday, August 1, 2026
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लखनऊ विश्वविद्यालय का 69वां दीक्षांत समारोह भव्यता के साथ संपन्न

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मेधावी छात्रों को प्रदान की उपाधियां एवं पदक

लखनऊ, 31 जुलाई। लखनऊ विश्वविद्यालय का 69वां दीक्षांत समारोह शुक्रवार को चौक स्थित अटल बिहारी वाजपेयी वैज्ञानिक कन्वेंशन सेंटर में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने समारोह की अध्यक्षता करते हुए मेधावी विद्यार्थियों को उपाधियां एवं पदक प्रदान किए। कार्यक्रम कुलपति प्रो. जय प्रकाश (जे.पी.) सैनी के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी सहित अनेक शिक्षाविद, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। शोभायात्रा, राष्ट्रगीत और विश्वविद्यालय कुलगीत के साथ समारोह का शुभारंभ हुआ।
अपने संबोधन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सभी उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि इस वर्ष विश्वविद्यालय से 57 हजार छात्र तथा 68,102 छात्राएं स्नातक एवं स्नातकोत्तर उपाधियां प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 111 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 204 पदकों से सम्मानित किया गया, जिनमें 31 छात्र और 80 छात्राएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पदक विजेताओं में छात्राओं की बड़ी भागीदारी महिला सशक्तिकरण और विकसित भारत की दिशा में सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक है। उन्होंने शिक्षा और अनुसंधान को राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार बताते हुए विश्वविद्यालयों से नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उसकी NAAC A++ ग्रेड, अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के बढ़ते आवेदन और वैश्विक पहचान का उल्लेख किया। उन्होंने सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र के लिए 83,562 करोड़ रुपये तथा उच्च शिक्षा के लिए 55,727 करोड़ रुपये के प्रावधान की जानकारी दी। साथ ही आईआईटी के लिए 12,123 करोड़ रुपये, एनआईटी के लिए 6,260 करोड़ रुपये के बजट और IICT मुंबई के सहयोग से देशभर के 15 हजार माध्यमिक विद्यालयों एवं 500 महाविद्यालयों में एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग एवं कॉमिक्स (AVGC) लैब स्थापित करने की योजना का उल्लेख किया। उन्होंने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की सराहना करते हुए पात्र परिवारों को मिलने वाली पांच लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुरक्षा का जिक्र किया।
राज्यपाल ने जल, वायु एवं मिट्टी के संरक्षण, वर्षा जल संचयन, मानसून के दौरान स्वच्छता, मौसमी रोगों से बचाव और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने 2 अगस्त से शुरू होने वाले ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ में युवाओं की सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। साथ ही महिला सुरक्षा, दहेज उन्मूलन, तकनीक के जिम्मेदार उपयोग, एचपीवी टीकाकरण, डिजिलॉकर के अधिकाधिक उपयोग तथा विश्वविद्यालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू किए जाने की सराहना करते हुए प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के सुझाव दिए। उन्होंने लोकतांत्रिक मर्यादाओं के पालन और सामाजिक मूल्यों के संरक्षण पर भी बल दिया।
कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी ने विश्वविद्यालय की प्रगति आख्या प्रस्तुत करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि स्वतंत्र चिंतन, आलोचनात्मक सोच और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करना है। उन्होंने यूनानी दार्शनिक सुकरात के “अनएक्जामिन्ड लाइफ इज़ नॉट वर्थ लिविंग”, जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट के “अपने विवेक का उपयोग करने का साहस करो” तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के “सा विद्या या विमुक्तये” का उल्लेख करते हुए शिक्षा को समग्र व्यक्तित्व विकास का माध्यम बताया।
प्रो. सैनी ने विश्वविद्यालय की शोध उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि शोध अनुदान में 12.26 प्रतिशत, शोध प्रकाशनों में 17.51 प्रतिशत तथा प्रकाशित पुस्तकों में पांच प्रतिशत की वृद्धि हुई है। विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा 8,407 स्कोपस-इंडेक्स्ड शोधपत्र प्रकाशित किए जा चुके हैं, जिन्हें 1.51 लाख से अधिक उद्धरण प्राप्त हुए हैं तथा स्कोपस H-इंडेक्स 119 से बढ़कर 130 हो गया है। प्रवेश आवेदनों में लगभग 30 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष 77 से अधिक देशों के विद्यार्थियों से 3,400 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 64 प्रतिशत अधिक हैं। विश्वविद्यालय ने फ्रांस और नेपाल के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन किए हैं, जिससे शोध, संकाय आदान-प्रदान और छात्र विनिमय को बढ़ावा मिलेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप जुलाई 2026 में माइक्रोसॉफ्ट के सहयोग से ग्रीन स्किल सेंटर और एप्लाइड एआई सेंटर की स्थापना की गई है, जहां प्रतिवर्ष 20 हजार विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हरित प्रौद्योगिकी और डिजिटल कौशल का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसी अवसर पर विश्वविद्यालय की ई-ऑफिस प्रणाली का भी शुभारंभ किया गया।
कुलपति ने बताया कि यूजीसी करियर एडवांसमेंट स्कीम के अंतर्गत 184 शिक्षकों को पदोन्नति प्रदान की गई, जिनमें 55 वरिष्ठ प्रोफेसर, 63 प्रोफेसर, 16 एसोसिएट प्रोफेसर और 45 असिस्टेंट प्रोफेसर शामिल हैं। संविदा शिक्षकों का मासिक मानदेय 35 हजार रुपये से बढ़ाकर 57,700 रुपये किया गया है। विद्यार्थियों के लिए मेगा प्लेसमेंट ड्राइव और पेड इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू किए गए हैं ताकि उन्हें रोजगार और व्यावहारिक अनुभव मिल सके।
खेल उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की 81 टीमों ने भारतीय विश्वविद्यालय संघ की प्रतियोगिताओं में भाग लिया। 44 खिलाड़ी खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करेंगे। खिलाड़ियों ने राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर कुल 35 पदक जीते, जिनमें राष्ट्रीय स्तर पर एक स्वर्ण और छह रजत तथा राज्य स्तर पर 14 स्वर्ण और 14 रजत पदक शामिल हैं। विश्वविद्यालय को उत्तर क्षेत्र अंतर-विश्वविद्यालय क्रिकेट प्रतियोगिता तथा अखिल भारतीय अंतर-विश्वविद्यालय पुरुष जूडो चैंपियनशिप की मेजबानी भी सौंपी गई है। साथ ही 18 नए महाविद्यालयों को संबद्धता प्रदान की गई है।
समारोह में कुल 111 विद्यार्थियों को 204 पदकों से सम्मानित किया गया। कुलाधिपति कांस्य पदक रिया गुप्ता, अंशिका सिंह, नीना पट्टू, तनुजा पट्टू, के.एम. हुसैन, मेधा द्विवेदी, अन्विता वर्मा, शुभम भारती, निधि आरती श्रीवास्तव तथा कंचन श्रीवास्तव को प्रदान किए गए। कुलाधिपति रजत पदक फराह चंद को बीएससी लाइफ साइंसेज की सर्वश्रेष्ठ छात्रा तथा विश्वविद्यालय की सर्वश्रेष्ठ छात्रा के रूप में मिला। पूर्व छात्रा निधि श्रीवास्तव को लगभग 30 वर्ष बाद पांच स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया।
विश्वविद्यालय ने शिक्षण और शोध में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रो. शशि भूषण, डॉ. नेहा अग्रवाल, डॉ. सरिता सिंह तथा डॉ. मंजुल त्रिवेदी को टीचर एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया।
दीक्षांत समारोह के दौरान आठ दिवसीय ‘दीक्षोत्सव-2026’ पर आधारित विशेष वीडियो का प्रदर्शन किया गया। विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए सोनवा प्राथमिक विद्यालय के बच्चों ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया, जबकि छात्रा प्राची गिरी ने “मेरी मां” कविता का भावपूर्ण पाठ किया। राज्यपाल ने बच्चों से संवाद कर उन्हें चॉकलेट भेंट की तथा पांच आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्री-स्कूल लर्निंग किट और विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को पुस्तकें वितरित कीं। विद्यार्थियों ने “जल है तो कल है” विषय पर लघु नाटिका प्रस्तुत कर जल संरक्षण का संदेश दिया।
उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने पदक विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि छात्राओं की बड़ी संख्या विकसित भारत की दिशा में सकारात्मक बदलाव का संकेत है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने, तकनीक का सकारात्मक उपयोग करने, पर्यावरण संरक्षण, कौशल विकास, नवाचार और आत्मनिर्भरता अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने एंटी-पेपर लीक कानून की सराहना करते हुए कहा कि इससे परीक्षा प्रणाली और अधिक पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनेगी।
मुख्य अतिथि प्रो. अभय करंदीकर ने दीक्षांत समारोह को विद्यार्थियों के जीवन का “लॉन्चिंग पैड” बताते हुए कहा कि सफलता के लिए ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास का संतुलन आवश्यक है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष विज्ञान और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में बढ़ती संभावनाओं का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से आजीवन सीखने, नवाचार करने और रोजगार मांगने के बजाय रोजगार देने वाला बनने का आह्वान किया। उन्होंने सेवा भाव, ईमानदारी और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
समारोह के दौरान विश्वविद्यालय की ई-ऑफिस प्रणाली का औपचारिक शुभारंभ, विश्वविद्यालय के प्रकाशनों एवं वार्षिक प्रतिवेदनों का विमोचन तथा विशिष्ट शिक्षकों का सम्मान भी किया गया। अंत में राष्ट्रीय गान एवं शैक्षणिक शोभायात्रा की औपचारिक विदाई के साथ 69वां दीक्षांत समारोह संपन्न हुआ, जिसने लखनऊ विश्वविद्यालय की शैक्षणिक परंपरा में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया।

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