Tuesday, April 28, 2026
Homeदुनियाईरान के विदेश मंत्री ने रूसी राष्ट्रपति से मुलाकात की, पुतिन बोले,...

ईरान के विदेश मंत्री ने रूसी राष्ट्रपति से मुलाकात की, पुतिन बोले, ‘रूस हर संभव मदद को तैयार

मॉस्को/सेंट पीटर्सबर्ग। व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात कर पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की और ईरान के प्रति समर्थन का संकेत दिया। इस बैठक में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी मौजूद रहे।

बैठक के दौरान पुतिन ने कहा कि रूस क्षेत्र में जल्द से जल्द शांति स्थापित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगा। उन्होंने ईरानी जनता की सराहना करते हुए कहा कि वे अपनी संप्रभुता और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए साहस और दृढ़ता से संघर्ष कर रहे हैं। रूसी मीडिया के अनुसार, पुतिन ने यह भी बताया कि उन्हें ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व की ओर से संदेश प्राप्त हुआ है, जिसके लिए उन्होंने आभार व्यक्त किया।

ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने रूस के समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने अपनी इस यात्रा से पहले ओमान और पाकिस्तान के नेतृत्व से भी वार्ता की थी, जो क्षेत्रीय कूटनीति को मजबूत करने की दिशा में एक प्रयास माना जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता किसी ठोस परिणाम तक नहीं पहुंच सकी है, जिससे ईरान अपने वैश्विक सहयोगियों के साथ संबंध मजबूत करने में जुटा है।

दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान के पास तनाव कम करने के लिए सीमित समय है। ट्रम्प ने संकेत दिया कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो अमेरिका कड़े कदम उठा सकता है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ होने वाली बैठक में ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य विकल्पों पर भी चर्चा हो सकती है।

ट्रम्प ने एक साक्षात्कार में दावा किया कि यदि ईरान का तेल निर्यात बाधित होता है, तो उसकी पाइपलाइन व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि तेल प्रवाह रुकने से पाइपलाइन में दबाव बढ़ेगा, जिससे तकनीकी रूप से नुकसान संभव है और उसे पुनः पूर्व स्थिति में लाना कठिन होगा।

वर्तमान घटनाक्रम से स्पष्ट है कि एक ओर रूस और ईरान के बीच कूटनीतिक निकटता बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के साथ तनाव भी बरकरार है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति और अधिक संवेदनशील हो सकती है, जहां कूटनीति और शक्ति संतुलन दोनों की अहम भूमिका रहेगी।

स्पेशल स्टोरीज