लखनऊ। राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी ने 10 अगस्त 1950 को तत्कालीन सरकार द्वारा राष्ट्रपति का अध्यादेश लाकर अनुच्छेद 341 के तहत अनुसूचित जाति की सूची में लगाए गए धार्मिक प्रतिबंध को पसमांदा मुसलमानों और ईसाइयों के साथ ऐतिहासिक अन्याय बताते हुए केंद्र सरकार से अनुच्छेद 341 से इस धार्मिक प्रतिबंध को हटाने की मांग की है।
इस सम्बंध में आयोजित प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 10 अगस्त 1950 का दिन पसमांदा मुसलमानों और ईसाइयों के लिए अन्याय का वह काला दिन है, जिसकी कीमत आज भी करोड़ो लोग चुका रहे हैं। राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल पहले दिन से इस भेदभाव के खिलाफ संघर्ष कर रही है और इस मुद्दे को लेकर दो दहाई से जागरूकता अभियान, आंदोलन, भूख हड़ताल व अन्य अभियान चलाती रही है और आज के दिन को ‘‘अन्याय दिवस‘‘ के रूप में मनाती रही है।
मौलाना रशादी ने कहा कि आज पसमांदा मुसलमान भाजपा को इतने प्रिय हो गए हैं कि उनके नाम पर भाषण, सम्मेलन और राजनीतिक नैरेटिव तो बनाया जा रहा है, लेकिन जैसे ही बात उनके सबसे बड़े मुद्दे, अनुसूचित जाति के आरक्षण पर लगे प्रतिबंध की आती है, तो भाजपा खामोश हो जाती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार पसमांदा मुसलमानों की बात करते हैं। सवाल यह है कि अगर पसमांदा मुसलमानों से इतना ही प्रेम है, तो उनके आरक्षण के सवाल पर भाजपा सरकार चुप क्यों है? उनके संवैधानिक अधिकार के सवाल पर कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया जा रहा है? उन्होंने कहा कि संविधान में आरक्षण का आधार धर्म नही बल्कि सामाजिक व आर्थिक पिछड़ापन है और इसलिए धर्म के आधार पर न तो किसी समुदाय को आरक्षण दिया जा सकता है और न ही छीना जा सकता है, जिन वंचित समुदाय के लोग समान सामाजिक और पारंपरिक पेशों से जुड़े हैं उन्हें संविधान ने समान आरक्षण दिया था और यह आरक्षण पसमांदा मुसलमान व ईसाइ समुदाय को वापस दिलाने तक कौंसिल का संघर्ष जारी रहेगा।
मौलाना आमिर रशादी ने उत्तर प्रदेश की मौजूदा भाजपा सरकार पर भी हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और अपराध चरम पर है और इसी को छिपाने के लिए मुसलमानों के साथ लगातार अन्याय, उत्पीड़न, हिंसा, बुलडोजर कार्रवाई और भेदभाव किया जा रहा है और कोई रोकने-बोलने वाला नही है।
अफसोस तो यह है कि जिनको थोक में वोट देकर सत्ता में लाने की सज़ा उत्तर प्रदेश का मुसलमान काट रहा है उन तथाकथित सेकुलर दलों के शीर्ष नेता, विधायक, सांसद भी इन मुद्दों पर खुलकर आवाज उठाने से बच रहे हैं क्योंकि उन्हे अपने दूसरे वोट बैंक के नाराज़ होने का डर है, आम मुसलमान को छोड़िये ये दल अपने मुस्लिम नेताओं पर हो रहे ज़ुल्म के खिलाफ तक आवाज़ नही उठाते हैं। ऐसे मंे इन दलों से आईंदा भी प्रदेश के मुसलमानों को कोई उम्मीद नही है और अब वो अपनी कयादत अपने हाथों में रखने का फैसला कर चुका है। इनकी चुप्पी अब स्वीकार नहीं की जाएगी और न ही अब इनकी सियासी गु़लामी की जाएगी, अब बराबरी और हिस्सेदारी की बात होगी।
मौलाना ने कहा कि राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत के साथ हिस्सा लेगी और सक्रिय भूमिका निभाएगी। कौंसिल मुसलमानों, अन्य वंचित समाज और कमजोर वर्गों के अधिकार, सम्मान, न्याय और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के सवाल को चुनावी और सामाजिक विमर्श के केंद्र में लाएगी और हम ख्याल दलों के साथ मिलकर एक नया विकल्प, एक नई सोच के साथ सत्ता परिवर्तन के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रखेगी।

