Saturday, July 25, 2026
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सियासत तेज, जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने मनाया जश्न

नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। नीट पेपर लीक मामले को लेकर पिछले 36 दिनों से जंतर-मंतर पर धरना दे रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) उनके इस्तीफे की मांग कर रही थी। शनिवार शाम करीब 8:15 बजे शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को सौंप दिया गया। जोशी पहले से खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, ऊर्जा तथा उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने खुशी जताई। सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा कि उनकी लड़ाई का पहला लक्ष्य पूरा हुआ है, लेकिन आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामले में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए और प्रदर्शन के दौरान कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई हो। पार्टी ने सोशल मीडिया पर इसे अपनी जीत बताया।
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे के बाद दो पन्नों का पत्र जारी किया, जिसमें उन्होंने अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए यह भी कहा कि कुछ लोगों ने युवाओं को भ्रमित करने का प्रयास किया। वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद विरोध के दबाव में इस्तीफा देने वाले वह पहले केंद्रीय मंत्री बताए जा रहे हैं। इससे पहले वर्ष 2018 में तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर ने ‘मी टू’ आंदोलन के दौरान लगे आरोपों के बाद इस्तीफा दिया था।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे लोकतंत्र, शांति और जनभागीदारी की जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह शांतिपूर्ण संघर्ष और धैर्य की सफलता है तथा आंदोलन में शामिल युवाओं और नागरिकों को बधाई दी।
इसी दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि नई पीढ़ी को आदेश देने के बजाय संवाद के माध्यम से समझाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि युवाओं के सवालों का तर्कपूर्ण उत्तर देकर ही उन्हें सही दिशा दिखाई जा सकती है।

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