लखनऊ।भारत में लगभग १० लाख लोग टाइप १ डायबिटीज़ के साथ जीवन जी रहे हैं, जो अमेरिका के बाद विश्व में दूसरी सबसे बड़ी संख्या है। इनमें से करीब ३ लाख बच्चे और किशोर २० वर्ष से कम आयु के हैं। हर वर्ष लगभग ३५,००० नए बच्चे और किशोर इस संख्या में जुड़ते हैं, जिससे भारत दुनिया में टाइप १ डायबिटीज़ वाले युवाओं की सर्वाधिक आबादी वाला देश बन गया है।समय पर निदान, उचित डायबिटीज़ शिक्षा और पीयर ग्रुप सपोर्ट के माध्यम से टाइप १ डायबिटीज़ से प्रभावित बच्चे सामान्य और संतोषजनक जीवन जी सकते हैं। इसी उद्देश्य सेएसजीपीजीआई लखनऊ के एंडोक्राइनोलॉजी और पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजी विभाग हर वर्ष सपोर्ट ग्रुप कार्यक्रम आयोजित करता है, ताकि टाइप १ डायबिटीज़ से जूझ रहे परिवारों को जोड़ा जा सके और उन्हें भावनात्मक व सामाजिक सहयोग मिल सके।इस वर्ष का टाइप १ डायबिटीज़ सपोर्ट ग्रुप कार्यक्रम २३ नवम्बर, रविवार को आयोजित हुआ, जिसमें लगभग ५० परिवारों सहित कुल २०० प्रतिभागी शामिल हुए। कार्यक्रम में डायबिटीज़ नर्स एजुकेटर्स, डॉक्टरों और स्टाफ द्वारा एक नाटक प्रस्तुत किया गया, जिसमें बताया गया कि टाइप १ डायबिटीज़ को प्रबंधित करने में सही शिक्षा कितनी महत्वपूर्ण है।बच्चों ने नृत्य और गायन के कार्यक्रम प्रस्तुत कर वातावरण को उत्साहपूर्ण बनाया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मैजिक शो रहा, जिसमें बच्चे और परिवार मंत्रमुग्ध होकर शामिल हुए।इस मौके पर एसजीपीजीआई लखनऊ के प्रोफेसर प्रीति दबडगांव और प्रोफेसर वी. भाटिया ने बच्चों और उनके परिवारों से संवाद किया तथा उन्हें प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि नियमित इंसुलिन उपचार और ब्लड शुगर की जांच डायबिटीज़ प्रबंधन की मूल नींव हैं। साथ ही उन्होंने परिवारों से अपील की कि वे टाइप १ डायबिटीज़ से संबंधित किसी भी प्रकार की गलत जानकारी का शिकार न हों।ऐसे सपोर्ट ग्रुप कार्यक्रम टाइप १ डायबिटीज़ से प्रभावित परिवारों को भावनात्मक संबल, सामाजिक जुड़ाव और साझा अनुभवों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं, ताकि कोई भी परिवार अकेला महसूस न करे।

