Friday, December 12, 2025
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कभी ‘भगवान गणेश’ समझकर करते थे लोग पूजा, अब मिला नया जीवन और नई पहचान

केजीएमयू में प्लास्टिक सर्जरी से ‘गणेश’ का बदला चेहरा

लखनऊ,9 नवम्बर 2025।राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के डॉक्टरों ने एक बार फिर चिकित्सा विज्ञान और मानवीय संवेदना का अद्भुत उदाहरण पेश किया है। केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी और न्यूरोसर्जरी विभाग की टीम ने कुशीनगर के 14 वर्षीय गणेश नामक बालक के चेहरे की सफल जटिल पुनर्निर्माण (रिकंस्ट्रक्टिव) सर्जरी कर उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी।यह वही बच्चा है, जिसके नाक से बचपन से ही एक बड़ा उभार निकला हुआ था, जिसे देखकर गांव के लोग उसे ‘भगवान गणेश’ का अवतार मानने लगे थे। इस अंधविश्वास के कारण परिवार ने वर्षों तक उसका इलाज नहीं कराया।
12 साल तक चला भ्रम, फिर जागी उम्मीद
कुशीनगर जिले के एक छोटे से गांव में जन्मे गणेश के नाक के बीचोंबीच जन्म से ही एक सूजन थी। डॉक्टरों ने जन्म के समय चिकित्सकीय निगरानी की सलाह दी थी, लेकिन गांव वालों ने उस सूजन को दैवी चिह्न मान लिया और बच्चे की पूजा करने लगे।
करीब 12 वर्षों तक परिवार ने कोई चिकित्सा हस्तक्षेप नहीं कराया, यह मानते हुए कि वह “भगवान गणेश का रूप” है।
लेकिन जैसे-जैसे गणेश बड़ा हुआ, नाक की सूजन लगातार बढ़ती गई। यह न केवल उसकी सांस लेने और बोलने में बाधा बनने लगी, बल्कि मानसिक और सामाजिक परेशानियों का कारण भी बन गई। अंततः एक परिचित के सुझाव पर परिवार ने गणेश को केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में दिखाया।
जांच में सामने आई दुर्लभ बीमारी
विस्तृत चिकित्सकीय और रेडियोलॉजिकल जांच के बाद डॉक्टरों ने गणेश में नैसोएथमॉइडल एनसेफालोसील विद हाइपरटेलोरिज़्म (Nasoethmoidal Encephalocele with Hypertelorism) नामक दुर्लभ जन्मजात स्थिति की पहचान की, जिसमें मस्तिष्क का एक हिस्सा खोपड़ी की हड्डियों के बीच से बाहर की ओर निकल आता है।
8 घंटे चली जटिल सर्जरी, मिला नया चेहरा
प्रो. डॉ. बृजेश मिश्रा (हेड ऑफ यूनिट, प्लास्टिक सर्जरी विभाग) के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने 8 घंटे लंबी सर्जरी कर गणेश का चेहरा पुनः संरचित किया।
सर्जरी के दौरान न्यूरोसर्जरी टीम, प्रो. डॉ. सोमिल जायसवाल के मार्गदर्शन में, मस्तिष्क संरचनाओं को सावधानीपूर्वक संभालने की ज़िम्मेदारी निभा रही थी।
सर्जरी की प्रक्रिया बेहद जटिल थी — डॉक्टरों ने पहले माथे की हड्डियों का हिस्सा हटाकर मस्तिष्क से निकली सूजन को अलग किया और बाद में नाक व माथे की हड्डियों को दोबारा इस तरह से जोड़ा कि गणेश का चेहरा सामान्य दिखने लगे।
अब गणेश पूरी तरह स्वस्थ है और उसका चेहरा लगभग सामान्य रूप में लौट आया है। उसके माता-पिता भावुक होकर बोले “हमने भगवान के रूप में जन्मे अपने बेटे को इंसान के रूप में वापस पाया है। डॉक्टरों ने जो किया है, वह किसी चमत्कार से कम नहीं।”
डॉक्टरों की टीम का सामूहिक प्रयास
इस सर्जरी में प्लास्टिक सर्जरी टीम का नेतृत्व प्रो. डॉ. बृजेश मिश्रा ने किया। उनके साथ डॉ. रवि कुमार, डॉ. बी. गौतम रेड्डी, और सीनियर रेज़िडेंट्स डॉ. गौरव जैन, डॉ. अज़हर फ़याज़, डॉ. साक्षी भट्ट, डॉ. रुचा यादव, डॉ. अंचल अग्रवाल और डॉ. आकांक्षा मेहरा शामिल थे।
न्यूरोसर्जरी टीम में प्रो. डॉ. सोमिल जायसवाल, डॉ. विष्णु वर्धन, डॉ. शुभ्रित त्यागी और डॉ. शुभम कौशल शामिल थे।
सर्जरी को सफल बनाने में एनेस्थीसिया टीम — डॉ. तनमय तिवारी और उनकी टीम — तथा नर्सिंग स्टाफ की प्रमुख सिस्टर सरिता का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
विज्ञान और विश्वास का संगम
प्रो. मिश्रा ने बताया कि यह एक अत्यंत जटिल सर्जरी थी, जिसमें “नाक की जड़ से मस्तिष्क का ऊतक बाहर आ गया था।” उन्होंने कहा ,“हमने पहले मस्तिष्क से सूजन को अलग किया, फिर चेहरे की हड्डियों को पुनर्निर्मित कर नाक और माथे की आकृति को सामान्य रूप दिया। यह सर्जरी चिकित्सा विज्ञान की तकनीकी क्षमता और मानवता की करुणा — दोनों का मिलन है।”
एक नई पहचान, एक नई मुस्कान
गणेश की यह कहानी इस बात की प्रेरक मिसाल है कि अंधविश्वास के बजाय सही समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप और जागरूकता जीवन बदल सकती है।कभी ‘भगवान गणेश’ कहकर पूजा जाने वाला यह बच्चा अब विज्ञान की मदद से एक नया चेहरा और सामान्य जीवन पा चुका है।

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