मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। लेबनान में इजराइली हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) को दोबारा बंद करने की घोषणा की है। ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने सरकारी मीडिया के माध्यम से कहा कि यह कदम कथित युद्धविराम उल्लंघनों के जवाब में उठाया गया है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने आरोप लगाया कि अमेरिका इजराइल को रोकने में विफल रहा है। उनका कहना है कि हाल ही में हुए अमेरिका-ईरान समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने और लेबनान में सैन्य गतिविधियां रोकने जैसे प्रावधान शामिल थे, लेकिन इजराइल द्वारा हमले जारी रखे गए।
इस बीच अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड में शांति वार्ता के लिए पहुंच चुके हैं। अमेरिकी पक्ष में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल हैं, जबकि ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्री अब्बास अराघची कर रहे हैं। वार्ता का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना और हालिया समझौते को बचाए रखना है।
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने जहाजों को होर्मुज क्षेत्र से गुजरने पर सुरक्षा जोखिम की चेतावनी दी है। हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) का दावा है कि समुद्री यातायात पूरी तरह बंद नहीं हुआ है और कई वाणिज्यिक जहाज अभी भी मार्ग का उपयोग कर रहे हैं।
भारतीय हितों के लिहाज से राहत की खबर यह रही कि भारत से जुड़े तीन तेल टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर अपने गंतव्य की ओर रवाना हो गए। वहीं इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिए हैं कि दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रणनीतिक समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।

